Thursday, October 3, 2013

रिश्ते और रास्ते

रिश्ते 
प्यार के, 
और रस्ते पहाड़ के ,

आसान तो बिल्कुल नही होते,

कभी आंधी, कभी तूफान,

कभी धूप, कभी छाया ,

तो कभी साफ आसमान नहीं होते ।  

थोड़ी सी बेचैनी से

सैलाब उमड़ पड़ते है अक्सर,

पर आंखे भी निचोड़ी जाय,

तो कभी  आँसू नहीं होते ,  

प्यार एक धर्म है,
मर मिटने का ,

जिसके हर कर्म मे मर्म तो है

पर हर कर्म के

विधि, विधान और संविधान नही होते,

भावनाओं की,

बैलेंस शीट नहीं बनाई जाती ,     

निवेशानुसार लाभ मिलेगा,

ये आश लगाई नहीं  जाती,  

कौन समझा है किसे ?

ये समझ कर भी।

कितना  समझा है कोई ?

अपने हालत समझ कर भी ॥

सच्चाई क्या है ?

कुछ  अहसास  नहीं देती  है  ,  

अब तो अपनी ही नजर

काफी कमजोर हुई लगती है,    

दिल है बोझिल

तो गनीमत है, बहुत कुछ है इसमे,

कितना बेचैन शहर है, 

अपने खालीपन मे ॥    

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         शिव प्रकाश मिश्रा

1 comment:

  1. Aap ki Kavita ne man ki gahraiyon ko Chu liya.....mabmohak....adbhut....adwitiya....

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