ग़ज़ल
"नहीं होते"
रिश्ते प्यार के और रास्ते पहाड़ के,
यारों, कभी भी आसान नहीं होते।
कभी आँधी, कभी तूफ़ान, कभी धूप, कभी छाँव,
सफ़र में रोज़ साफ़ आसमान नहीं होते।
ज़रा-सी बात पर दिल में उमड़ आते हैं सैलाब,
मगर हर दर्द के आँखों में निशान नहीं होते।
प्यार इबादत है, सौदा नहीं दुनिया वालों,
मोहब्बतों के भला कोई दाम नहीं होते।
वफ़ा के रास्ते चलते हैं दिल के सहारे,
इन सफ़रों के कहीं नक्शे-निशान नहीं होते।
भावनाओं की भी बैलेंस शीट बनाते हैं लोग,
मगर रिश्तों में कभी लाभ-हानि नहीं होते।
कौन किसको यहाँ कितना समझ सका है आख़िर,
दिलों के राज़ यूँ ही सब पर अयाँ नहीं होते।
जो दिख रहा है वही सच हो, ज़रूरी तो नहीं,
हर आईने के चेहरे भी ज़ुबान नहीं होते।
उम्र भर साथ चलें फिर भी अजनबी रहें लोग,
सिर्फ़ मिलने से सभी अपने समान नहीं होते।
दिलों की चोट का अंदाज़ अलग होता है,
हर ज़ख़्म के जिस्म पर निशान नहीं होते।
दिल बहुत बोझिल है फिर भी यही ग़नीमत है,
पत्थरों के शहरों में सब इंसान नहीं होते।
मक़ता
'शिव' ये रिश्ते भी पहाड़ों की तरह होते हैं,
दूर से जितने सरल दिखें, उतने आसान नहीं होते।
~~~~~~~शिव प्रकाश मिश्रा ~~~~~~~~~~~~