Wednesday, May 27, 2026

तिनके का सहारा


                    डूबते को तिनके का सहारा 

                                     — शिव प्रकाश मिश्रा

                                              जुलाई १९८०


"डूबते को तिनके का सहारा", 

कितना सहज है, यह कहना तुम्हारा!

 पर मैंने तो देखा है लोगों को— 

उसी तिनके में उलझ कर, 

असहाय डूबते हुए।

 तुम यह क्यों नहीं कहते?

                   कि यह बात है, सिर्फ़ कहने के लिए!

अभी कुछ देर पहले, 

मैं कितनी ऊँचाई पर उड़ रहा था। 

मैंने ऊँचाई तो बहुत देखी है, 

अब गहराई देखना चाहता हूँ! 

'बच नहीं सकता यहाँ से गिरकर इस दरिया में'— 

आसमान से गिरते हुए मैं यही सोच रहा था, 

और यह भी... कि क्या कोई तिनका बचाने आएगा मुझे?

क्योंकि तैरना मुझे आता नहीं,

 पर उड़ना? वह तो अनिवार्य शर्त है मेरे जीवन की। 

आखिर, बिना उड़े भी कोई पक्षी कहलाएगा क्या? 

और  कोई पक्षी, तैर कर दरिया पार करेगा क्या?

मैं पानी में गिरा हूँ, ये संयोग नहीं, प्रयोग है मेरे लिए—

 किसी तिनके का! 

वरना... अपनी मर्ज़ी से यहाँ, 

डूबना किसे अच्छा लगता है?

~~~~~~~~~~~~~~शिव मिश्रा ~~~~~~~~~~~~~~







Tuesday, May 26, 2026

मां अगर तुम न होती ....


माँ, अगर तुम न होती

माँ, अगर तुम न होती,

तो मैं ही कहाँ होता?

इन साँसों की डोरी में,
कोई नाम कहाँ होता?

जब इस दुनिया में आया,
तुमने ही गले लगाया,

मेरे देखे हर सपने को
तुमने ही तो सजाया।

तेरी उँगली को थामे ही,
 मैंने चलना सीखा है, 
तेरी ममता की छाँव में, 
हर दर्द मेरा फीका है।

 जब रोया मैं रातों में,               

लोरी गाकर सुलाया है,               

मेरी छोटी सी दुनिया को,          

अपने आँचल से सजाया है।

तेरी गोदी का वो झूला, 

हर ख़ुशी से बढ़कर प्यारा है, 

भटकूँ जब इस दुनिया में,

 तू ही मेरा ध्रुवतारा है।

मेरी हर एक शरारत  को, 

हँसकर तुमने माफ़ किया, 

मेरे जीवन के रस्ते को,  

आसुओं  से अपने साफ़ किया।

मेरी अंधियारी राहों में
दीपक सा तुम जलती हो,

जीवन की हर ठोकर पर
ममता बनकर मिलती हो।

मैं गिरकर उठ जाता हूँ,
जब शक्ति तुम्हारी पाता हूँ,

मेरी पहली भाषा हो तुम,
विश्वास की परिभाषा हो तुम।

मुझमें जो कुछ भी अच्छा है,
उसकी रचनाकार हो तुम,

मेरे हर छोटे से गुण का भी 
सुंदर सा आधार हो तुम।

हर संकट, हर मुश्किल में
तेरे आशीष बचाते हैं,

मैं जब भी गिर जाता हूँ,
तेरे हौसले उठाते हैं।

भूखा ही रह जाता मैं,
यदि तेरी ममता न मिलती,

सूनी पड़ जाती यह दुनिया,
आँचल की छाँव नही मिलती।

मेरी हर मिली सफलता पर
मुझसे ज्यादा तुम खिलती हो,

मेरी हर छोटी पीड़ा में
मुझसे ज्यादा तुम रोती हो।

मेरी समझ, शब्द और स्वर
सब तेरी ही तो थाती हैं,

जो कुछ भी मैं लिख पाता हूँ,
तेरे संस्कारों की बाती हैं।

माँ, तुम केवल रिश्ता नहीं,
मेरे जीवन का आधार हो,

ईश्वर मुझे मिले न मिले,
तुम मेरे लिए अवतार हो।

खुशियाँ सारी इस जग की, 

तेरे कदमों में लाकर रख दूँ, 

अगर मिले मुझको  मौका , 

तो अपनी उम्र भी तुझको दे दूँ।

तू ही मेरी पूजा है माँ, 

तू ही मेरा भगवान है, 

तेरे ही दम से चलती, 

इस बच्चे की जान है।

माँ, अगर तुम न होती,

तो मैं ही कहाँ होता?

भीड़  भरी  इस दुनिया में
मेरा नामो-निशाँ न होता।

~~~~~~ शिव मिश्रा ~~~~~~