वक़्त से पहले ....
— शिव प्रकाश मिश्रा (मूल कृति: २० अक्टूबर १९८३)
भावनाएँ जलती हैं कभी...
सिद्धांतों के संकुचित घेरे में,
जैसे किसी प्रेमी का पत्र—
दिन के अंधेरे में!
चूर-चूर होता है व्यक्तित्व,
या संपूर्ण अस्तित्व,
जीवन में कई बार।
हल्की-सी हिचकी,
ले लेती है भूकंप का स्वरूप,
और आस्था के आयाम...
लेते हैं एक नई हिलकोर!
पतझड़-सी बिखरती हैं आशाएँ,
और चुभते हैं काँटों-से उपदेश।
फीके लगते हैं सैद्धांतिक आदर्श,
और अविस्मरणीय अवशेष।
दुखता है रोम-रोम अनजानी पीड़ा में,
होते हैं सूने सपने सुनहले,
जब परम प्रिय-सा कुछ खोता है—
अप्रत्याशित,
अकल्पनीय,
और वक़्त से पहले...
*******************शिव प्रकाश मिश्र२० अक्टूबर १९८३********************
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Friday, February 19, 2016
वक़्त से पहले ....
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