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Sunday, July 19, 2026

वर्षा

भीग जाना चाहिए...

कड़कती सर्दी में, धधकती गर्मी में,
आँधी और तूफ़ानों की बेरहम लहरों में,
अपने घर की चौखट पर ठहर जाना अच्छी बात है,
मगर जब—

सावन की बहार हो,
रिमझिम की फुहार हो,
तो फिर भीग जाना चाहिए। ॥1॥


हर पल सहमे-सहमे जीना
जीवन की पहचान नहीं,
सिर्फ़ साँसों का बोझ उठाना
जीने का सम्मान नहीं।

अनजानी राहों में,
संघर्ष की बाँहों में,
संभलकर चलना अच्छी बात है,
मगर जब—

दिल ही आवाज़ लगाए,
सपना सामने मुस्काए,
तो फिर दौड़ जाना चाहिए। ॥2॥


हर लम्हे का कोई तर्क नहीं होता,
हर सपने का कोई मोल नहीं होता।
जो अपने ही दिल की धड़कन न सुन पाए,
उससे बड़ा कोई शोर नहीं होता।

वक़्त के थपेड़ों में,
ज़िंदगी के झमेलों में,
ख़ामोशी ओढ़ लेना अच्छी बात है,
मगर जब—

अपनों में तकरार हो,
रिश्तों को मनुहार हो,
तो फिर झुक जाना चाहिए। ॥3॥

दीपक आँधियों से लड़ता है,
नदियाँ पर्वत चीर निकलती हैं।
जो जोखिम से रिश्ता रखते हैं,
मंज़िलें अक्सर उन्हीं को मिलती हैं।

जंगली रातों में,
पथरीली राहों में,
सतर्क रहना अच्छी बात है,
मगर जब—

मायूसी की रात ढल जाए,
उम्मीदों का सूरज निकल आए,
तो फिर मुस्कुराना चाहिए। ॥4॥

हर मौसम सुहाना नहीं होता,
हर चेहरा बेगाना नहीं होता।
हर ठोकर मंज़िल छीन नहीं लेती,
हर अँधेरा हमेशा का ठिकाना नहीं होता।

अनजाने मोड़ों पर,
लक्ष्य के छोर पर,
संघर्ष करना अच्छी बात है,
मगर जब—

लहज़ों में तल्ख़ी हो,
बातों में कड़वाहट हो,
तो फिर मुस्कुराकर आगे बढ़ जाना चाहिए। ॥5॥

सर्द हवाओं से लड़कर
पेड़ अपनी जड़ें नहीं छोड़ते।
बादल चाहे जितना भटक लें,
आख़िर धरती पर ही बरसते।

फूलों का धर्म है महकना,
दीपों का धर्म है जलना।
अपने सुरक्षित दायरों में रहना अच्छी बात है,
मगर जब—

ख़ुशियों का मौसम हो,
चाहत का आलम हो,
तो फिर बाँहें फैलाकर झूम जाना चाहिए। ॥6॥

हर ख़्वाब मुकम्मल नहीं होता,
हर इंतज़ार सफल नहीं होता।
जो किस्मत में लिखा है,
उससे पहले कुछ हासिल नहीं होता।

इन सच्चाइयों के साथ
जीना अच्छी बात है,
मगर जब—

कोई दिल में उतर जाए,
प्यार आँखों से छलक जाए,
तो फिर तैर जाना चाहिए। ॥7॥

ज़िंदगी हर वक़्त एहतियात का नाम नहीं,
हर मोड़ पर हिसाब-किताब का काम नहीं।
कुछ पल ऐसे भी आते हैं,
जब तर्क से अधिक विश्वास ज़रूरी होता है।

जब हँसी बेवजह आ जाए,
जब आँखें यूँ ही भर आएँ,
जब मन कहे—"यही क्षण है",
तो फिर...

भीग जाना चाहिए,
दौड़ जाना चाहिए,
झुक जाना चाहिए,
मुस्कुराना चाहिए,
आगे बढ़ जाना चाहिए,
झूम जाना चाहिए,
और...

पूरी शिद्दत से जी जाना चाहिए।

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~ शिव मिश्रा