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Monday, June 29, 2026

रिश्ते पहाड़ों जैसे होते हैं

 

रिश्ते पहाड़ों जैसे होते हैं

— शिव प्रकाश मिश्रा

रिश्ते प्यार के और रास्ते पहाड़ के,
यारो, कभी भी आसान नहीं होते।

पहली नज़र में जितने सुंदर दिखते हैं,
उतने सरल उनके अभियान नहीं होते।

कभी धूप तपाती है, कभी बादल घिर आते,
जीवन के सब मौसम मेहरबान नहीं होते।

बर्फ़ पिघलती है तब जाकर झरने गाते हैं,
रिश्ते भी इक पल में वरदान नहीं होते।

पगडंडी ही अक्सर शिखरों तक ले जाती है,
हर चौड़ी सड़क के ऊँचे सम्मान नहीं होते।

जो चुप हैं, वे भी अपने भीतर बहुत कुछ रखते हैं,
पत्थर भी हर बार बेजान नहीं होते।

झरनों की हँसी के पीछे वर्षों का संघर्ष छिपा है,
सुख के पीछे कितने तूफ़ान नहीं होते।

कभी स्वयं को भी दूसरों की जगह रखकर देखो,
सारे दोष हमेशा औरों के नाम नहीं होते।

मकान बनाना तो आसान है इस दुनिया में,
लेकिन हर आँगन सचमुच घर नहीं होते।

दिल की हर पीड़ा का अपना इतिहास रहा करता है,
हर आँसू के पीछे केवल अवसान नहीं होते।

पत्थरों के इस कठोर समय में भी विश्वास रखो,
हर इंसान के भीतर पत्थर प्राण नहीं होते।

समापन

'शिव' रिश्ते पहाड़ों जैसे ही होते हैं—
जितने ऊँचे, उतने धैर्यवान;
जितने कठोर, उतने ही जीवनदायी;
और दूर से जितने सरल दिखें,
उतने आसान नहीं होते।