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Wednesday, September 23, 2020

तुम इतना क्यों तिलमिला रहे हो ?

 

जया बच्चन जी को समर्पित

                   “तुम इतना क्यों तिलमिला रहे हो?

                     क्या बात है, जो बड़बड़ा रहे हो? 


"भैया हमारे थे तो शराबी, 

पान बनारस का खा रहे हैं,

 भंग के रंग में घूम-घूम कर, 

ठुमके भी खूब लगा रहे हैं, 

कौन हैं वे जो ड्रग्स ले रहे हैं? 

तुम उनको क्योंकर बचा रहे हो?....१.

 

तुम्हारे दलदल के एक नेता, 

जो जेल में चैन फरमा रहे हैं, 

रंग जांघिया जयाप्रदा का, 

बता-बता मुस्कुरा रहे हैं, 

छलनी है ये तुम्हारी दुनिया,

थाली जिसे तुम बता रहे हो?....२."

 

"स्मृति ईरानी को भी नचनिया, 

बता दिया था जब ही किसी ने, 

तुम चुप रही थीं जब कंगना को, 

हरामखोर था बोला किसी ने, 

शोभा न देता संसद के सदन को, 

तुम सबको क्यों धमका रहे हो?...३.

 

अब न रही वह फिल्मी दुनिया, 

न तो गुड्डी, न चक्कू-छुरिया, 

अब हैं पीके, बजरंगी भाईजान, 

शान बना अब, 'माय नेम इज खान',

 कितना सहेगा अब और हिंदू,

                      क्यों धर्म मोहरा बना रहे हो?...४.


बने नास्तिक, शिकवा नहीं है,

मजहबी प्रेम पर अचरज नहीं है, 

मजारों पे चढ़तीं चादरें बच्चनों की, 

पूछ रही हैं क्या खता राम की?

 बने भव्य मंदिर अयोध्या में जिनका,

 तुम क्यों नहीं कुछ कह पा रहे हो?.. ५.."

 

                     “तुम इतना क्यों तिलमिला रहे हो?

                     क्या बात है, जो बड़बड़ा रहे हो?  


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******** शिव प्रकाश मिश्रा ********

                 २२ सितम्बर २०२०