Friday, February 19, 2016

वक़्त से पहले ....




      वक़्त से पहले ....

— शिव प्रकाश मिश्रा (मूल कृति: २० अक्टूबर १९८३)

भावनाएँ जलती हैं कभी...

 सिद्धांतों के संकुचित घेरे में,

 जैसे किसी प्रेमी का पत्र—

 दिन के अंधेरे में!

चूर-चूर होता है व्यक्तित्व, 

या संपूर्ण अस्तित्व, 

जीवन में कई बार।

 हल्की-सी हिचकी,

 ले लेती है भूकंप का स्वरूप,

 और आस्था के आयाम... 

लेते हैं एक नई हिलकोर!

पतझड़-सी बिखरती हैं आशाएँ, 

और चुभते हैं काँटों-से उपदेश। 

फीके लगते हैं सैद्धांतिक आदर्श

और अविस्मरणीय अवशेष।

दुखता है रोम-रोम अनजानी पीड़ा में, 

होते हैं सूने सपने सुनहले, 

जब परम प्रिय-सा कुछ खोता है—

 अप्रत्याशित, 

अकल्पनीय, 

और वक़्त से पहले...

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शिव प्रकाश मिश्र
२० अक्टूबर १९८३ 
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