हड़ताल ....... सूखा
— शिव प्रकाश मिश्रा
(मूल कृति: १९७९ — ६ नवम्बर १९७९ को 'दैनिक वीर हनुमान', औरैया में प्रकाशित)
होकर परेशान महँगाई भत्ते से,
वर्षा विभाग सहित, इंद्र ने कर दी हड़ताल!
सूखे की आग में जलती फ़सलों को जैसे—
घर में श्मशान देख, जनता हो गई बेहाल।
आवश्यक सेवाओं में भी,
अब तो हड़ताल होने लगी है,
और नज़रबंदी में...
जमाखोरी की आदत बनी है।
हे इंद्र देव! अब तो दया कर दो,
कंट्रोल से न सही,
ब्लैक में ही... वर्षा कर दो!!
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^- शिव प्रकाश मिश्र^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^मूल कृत - १९७९, ६ नवम्बर १९७९ को दैनिक वीर हनुमान औरय्या में प्रकाशित
Tuesday, February 23, 2016
हड़ताल ....... सूखा
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