सिर्फ तेरा साथ हो..
— शिव प्रकाश मिश्रा (मूल कृति: अगस्त १९८१)
ज़ुल्फ़ों की छाँव में, सपनों के गाँव में,
अधरों को ढूँढ़ती, नन्ही सौगात हो।
घर में, जमात में, दिल में, दवात में,
बचपन से खेलता, जवानी का हाथ हो।
आँखों से आँखों में, टूटती साँसों में,
कस्तूरी-से महकते, अपने जज़बात हों।
सावन के झूलों में, वर्षा की बूँदों में,
प्रेम से भीगते, हम एक साथ हों।
*****************शिव प्रकाश मिश्र
मूल कृति अगस्त १९८१
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