Tuesday, February 23, 2016

सपना....The Dream



        सपना

— शिव प्रकाश मिश्रा

 

रात्रि सपने में जो देखा था, 

वही रंग दिन में उभर आया। 

खामोशियाँ गुदगुदी कर गईं, 

दिल में ही दर्पण-सा नज़र आया।

पवन के मात्र लघु झोंके से, 

सुगंधों का बड़ा तूफ़ान आया।

 सौंदर्य की झलकियाँ ऐसी कि,

 चित्रकारों पर तरस आया!

मुग्ध हो भानु ने जब देखा,

धरा को नाचते पाया......


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-   शिव प्रकाश मिश्र
-    S.P.MISHRA

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