Friday, February 18, 2022

कैसे हम सबके दीपक जलेंगे ?

"कैसे हम सबके दीपक जलेंगे"


कब जले दीपक हम  देख ही न पाये ,

कैसी थी रोशनी? अँधेरा  मिटा न पाये ,


अँधेरे में रहकर स्वविवेक खो  दिया है ,

आस्था को धक्का दे कबका गिरा दिया है

सब कुछ लुटा दिया, कुछ भी समझ न पाये,

चेहरे पे किसके क्या है, ये तक  न जान पाये ,


इस ओर अँधेरे के हम कैदी बने हुये  हैं ,

उस ओर उजाले  के  प्रहरी  खड़े  हुये हैं ,

जब तक रहेगी ऐसी दीवाल विभाजन  की,

हो चाहे दिवाली ही, होली जलेगी सपनो की, 


उस पर सिकेगी रोटी स्वार्थ व अधिकारों की,

तब तक सजा मिलेगी, दर्द सह चुप रहने की,

आंखे भी है और अंधे भी, समझेगा कोई कैसे

बिन रोशनी के दीपक, कोई  जला  हो जैसे,


इन आँखों से जब तक आंसू गिरेंगे,

कैसे  हम सबके  दीपक जलेंगे  ?

कब जल उठे दीपक, हम देख ही न पाए, 

कैसी थी वह रोशनी, जो अंधेरा मिटा न पाए?

अंधेरे में रहकर मानो स्वविवेक खो दिया है, 

आस्था को धक्का दे, कबका गिरा दिया है।

 सब कुछ लुटा चुके, पर कुछ समझ न पाए, 

 चेहरे पर किसके क्या है, यह भी न जान पाए।

इस ओर अंधेरे के हम कैदी बने हुए हैं,

 उस ओर उजाले के प्रहरी खड़े हुए हैं।

 जब तक रहेगी ऐसी दीवार विभाजन की,

हो भले दिवाली ही, होली जलेगी सपनों की!

जिस पर सिकेगी रोटी स्वार्थ-अधिकारों की,

तब तक सज़ा मिलेगी, दर्द सह चुप रहने की।

 आँखें भी हैं और अंधे भी, समझेगा कोई कैसे?

 बिन लौ के ही जैसे, कोई दीप जला हो जैसे!

इन आँखों से जब तक यूँ आँसू गिरेंगे,

 तब तक कैसे भला, हम सबके दीपक जलेंगे?


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       - शिव मिश्रा 

मूलकृति अक्टूबर २०१६ 

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1 comment:

  1. 🙏😇🛐⛩️🔘⛩️🛐😇🙏
    प्रस्तुति : @VikasMohanProAc
    कसमसाहट ...: कैसे हम सबके दीपक जलेंगे ?: shivemishra1.blogspot.com/2020/03/blog-p…
    https://twitter.com/BharatBodhisatv/status/1865193212408988112?s=19

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