विस्मित मुस्कान हो, लाल आसमान हो, पलकें उठें झुकें, लब थर-थराएँ रुकें , पास तुम बैठी रहो, लहराती आंचल. II1II
गुल मोहर खिले कहीं दो पल मिलें कहीं और एक साथ गिनें हृदय की धडकनें चांदनी ढके रहे छोटा सा बादल.. II2II
तारों की बारात हो,
खामोश सी रात हो,
सांसें कुछ कहें-सुनें,
ख्वाब नए हम बुनें,
खोए रहें हम-तुम,
भीगा सा काजल.. II3II
धीमी सी बयार हो,
सांसों में प्यार हो,
जुगनू चमकें कहीं,
हम-तुम खोएं कहीं,
मन में उठती रहे,
मीठी सी हलचल.. II4II
भोर का पैगाम हो,
होंठों पे तेरा नाम हो,
अगर जन्मों का साथ हो,
हाथों में हाथ हो,
यूं ही बीतता रहे,
जीवन का हर पल.. II5II
No comments:
Post a Comment