Sunday, July 19, 2026

भीग जाना चाहिए... (गीत)

🎵 भीग जाना चाहिए... (गीत)

— शिव मिश्रा


कड़कती सर्दी में, धधकती गर्मी में,

आँधी में, तूफ़ान में, घर में रहना अच्छी बात है...

मगर जब सावन की बहार हो,

रिमझिम-सी फुहार हो,

सूना मन फिर से गुलज़ार हो...

तो फिर बाहर निकलना चाहिए,

भीग जाना चाहिए,

जी भर कर जी लेना चाहिए!


हर पल सहमे-सहमे जीना, जीवन की पहचान नहीं,

सिर्फ़ साँसों का बोझ उठाना, जीने का सम्मान नहीं।

अनजानी राहों में, संघर्ष की बाँहों में, संभलकर चलना अच्छी बात है...

मगर जब दिल आवाज़ लगाए,

सपना सच होने को आए...

तो फिर दौड़ जाना चाहिए,

और मुस्कुराना चाहिए,

जी भर कर जी लेना चाहिए! (1)

 


हर लम्हे का कोई तर्क नहीं, सपनों का कोई मोल नहीं,

जो अपने दिल की सुन न सके, उससे बड़ा कोई शोर नहीं।

वक़्त के थपेड़ों में, जीवन के झमेलों में, चुप रह जाना अच्छी बात है...

मगर जब अपनों की दरकार हो,

रिश्तों में बहता प्यार हो...

तो फिर झुक जाना चाहिए,

गले मिलना चाहिए,

जी भर कर जी लेना चाहिए! (2)

 


दीपक आँधी से लड़ता है, नदियाँ चट्टानों से भिड़ती हैं,

जो ख़तरों से खेलते हैं, मंज़िलें उन्हीं को मिलती हैं।

पथरीली राहों में, अँधेरी रातों में, सतर्क रहना अच्छी बात है...

मगर जब उम्मीद का सूरज हो,

जीवन का एक नया सवेरा हो...

तो फिर मुस्कुराना चाहिए,

खुश होना चाहिए,

जी भर कर जी लेना चाहिए! (3)

 


सर्द हवाएँ थम जाती हैं, पतझड़ भी बीत ही जाता है,

जो जड़ों से जुड़े रहते हैं, उनका जीवन खिल जाता है।

अपने दायरों में, अपने फैसलों में, संतुलित रहना अच्छी बात है...

मगर जब ख़ुशियों का मिज़ाज हो,

प्यार का पहला आगाज़ हो...

तो फिर बाँहें फैलाना चाहिए,

झूम जाना चाहिए,

भीग जाना चाहिए,

जी भर कर जी लेना चाहिए...

           दिल से जी लेना चाहिए! (4)


          ~~~~शिव मिश्रा ~~~~~~~~~~~~  

 


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